मंगलवार, अप्रैल 30, 2013


    " साथ "
 http://krishan-kayat.blogspot.com
 वो साथ चलने का
वादा करे तो
 मंजिल को
भूल जाऊं मैं
होगा जो साथ वो
तो मंजिल इक सजा है
क्यूंकि...........
 उसके साथ होने से
पहुँचने में नहीं
सफ़र में ही मजा है ......   कृष्ण कायत 


http://krishan-kayat.blogspot.com

2 टिप्‍पणियां:


  1. बढ़िया प्रस्तुति
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    lateast post मैं कौन हूँ ?
    latest post परम्परा

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