बुधवार, मई 29, 2013

" नादान "

 " नादान "

वो जानता है कि हम
उसके बिना रह नहीं सकते
इसीलिए इतना इतराता है वो.......
उसकी गलतियों पर
खफा हों भी तो कैसे
मुझे मनाने की बजाये
खुद रूठ जाता है वो ...........
मेरी जिंदगी बन गया
है प्यार उसका
तभी तो बार बार
मुझे सताता है वो ............
" कायत " बस गया
जो दिल की गहराइयों में
है जान से भी प्यारा
फिर क्यों नादान
इस दिल को जलाता है वो ...........

कृष्ण कायत ( पुरानी यादों से ..........)
http://krishan-kayat.blogspot.com/

"प्यार"


             
                               "प्यार"

इश्क तो सदियों से रहा है काँटों का ताज
मासूम दिल उसे फूलों का हार समझ बैठा
बेमुरव्वत दौर में अपने भी हो गये हैं पराये
और नासमझ परायों को यार समझ बैठा
उसने तो की थी दिल बहलाने को दिल्लगी
ये नादाँ "कायत" उसे प्यार समझ बैठा ......

कृष्ण कायत ( पुरानी यादों से ...|)

शराफत

 (   शराफत  )

वहम में जीने की
जब आदत बन जाती है
सच्चाई का सामना
फिर आफत बन जाती है
दिल चाहता है
मचा दूं तूफ़ान इस ज़माने में
पर मजबूरियों में टूट कर
खामोश रह जाना
इस आम इंसान की
शराफत बन जाती है....

कृष्ण कायत
http://krishan-kayat.blogspot.com/

(सबब )

            (सबब )

गुमनामियों के दायरे से निकल
वो इतना मशहूर हो गये ........
जितना हम उनके पास आये
वो उतना हमसे दूर हो गये ......
सीख लिया उसने ओरों संग जीना
पर हम टूट कर चूर हो गये ......

( वहम )

  ( वहम )
वो कहती है मुझसे
प्यार वहम होता है
इस दुनिया में
कोई नहीं
जो हमारा होता है
मैंने कहा
वहम ही सही
बना रहने दो
जीने का तो
इक सहारा होता है .......
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...